| प्रकाशन/प्रसारण | विवरण | लिंक |
सोमवार, 13 मई 2024
प्रकाशन एवं प्रसारण
उपलब्ध सुविधाएं
| सुविधा | आवश्यकता | शुल्क |
| आधार धन निकासी BOB को छोडकर | आधार कार्ड | - |
| धन हस्तांतरण | यूपीआई आईडी खाता विवरण QR कोड |
1% |
| लेमिनेसन | - | 10 |
| ID कार्ड प्रिंटिंग | - | 50 |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो | - | 10/3 |
| प्रिंट आउट | - | 10क |
| फोटो कॉपी | - | 2 |
| विद्युत बिल | विद्युत खाता संख्या | - |
| रिचार्ज | - | - |
| ऋण EMI भुगतान | - | 1% |
रविवार, 12 मई 2024
उपलब्ध योजनाए
| योजना | लाभ/आवश्यकता | पात्रता | आवश्यक पत्रक | शुल्क/लिंक |
| उप्र पुलिस विभाग चरित्र सत्यापन | विभिन्न सरकारी व्यक्तिग्त कार्यों में | प्रदेश निवासी | आधार फोटो मोबाइल नंबर |
- |
| उप्र किसान पंजीकरण अनुदान हेतु | बीज,यंत्र आदि कृषि अनुदान | कृषक समस्त | आधार आधार ओटीपी बैंक पासबूक मोबाइल नंबर खतौनी |
- |
| शौचालय निर्माण अनुदान | 12000 रुपए की अनुदान सहायता | कम आय वाले सभी परिवार | आधार कार्ड बैंक खाता मोबाइल नंबर और OTP |
50 |
| आयुष्मान कार्ड | परिवार को 5 लाख तक का वार्षिक निशुल्क उपचार | PMJAY सूची में सम्मिलित परिवार अंतोदय लाल कार्ड धारक परिवार 6सदस्यों वाले पात्र गृहस्थी परिवार राशन कार्ड धारक जिनके सभी सदस्य 60वर्ष से अधिक उम्र के है |
आधार कार्ड लाभार्थी की उपस्थिती |
कार्ड प्रिंट 50 |
| लघु सिचाई बोरिंग योजना | बोरिंग | न्यूनतम भूमि 0.2 हे० अधिकतम १ हे० SC/ST के लिए न्यूनतम ०.१ हे० अधिकतम सीमा नहीं |
फोटो, हस्ताक्षर आधार खतौनी किसान पंजीकरण पारदर्शी या पीएम किसान sc/st हेतु जाति प्रमाण पत्र |
50 |
| ई डिस्ट्रिक्ट | निवास,आय,जाति | सभी | आधार कार्ड आधार OTP स्वघोषणा पत्र |
50 |
रविवार, 24 मार्च 2024
मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह विघ्न बाधाओं के बीच भी भगवदनिष्ठा टिकाए रखकर संसार सागर से पार होने का संदेश देने वाला पर्व 'होली' की हार्दिक शुभकामनाएं !
होली भारतीय संस्कृति की पहचान का एक पुनीत पर्व है, भेदभाव मिटाकर पारस्परिक प्रेम व सदभाव प्रकट करने का एक अवसर है |अपने दुर्गुणों तथा कुसंस्कारों की आहुति देने का एक यज्ञ है तथा परस्पर छुपे हुए प्रभुत्व को, आनंद को, सहजता को, निरहंकारिता और सरल सहजता के सुख को उभारने का उत्सव है |
यह रंगोत्सव हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता है जो अनेक विषमताओं के बीच भी समाज में एकत्व का संचार करता है | होली के रंग-बिरंगे रंगों की बौछार जहाँ मन में एक सुखद अनुभूति प्रकट कराती है वहीं यदि सावधानी, संयम तथा विवेक न रख्खा जाये तो ये ही रंग दुखद भी हो जाते हैं | अतः इस पर्व पर कुछ सावधानियाँ रखना भी अत्यंत आवश्यक है |
वर्त्तमान समय में होली के दिन शराब अथवा भंग पीने की कुप्रथा है | नशे से चूर व्यक्ति विवेकहीन होकर घटिया से घटिया कुकृत्य कर बैठते हैं अतः नशीले पदार्थ से तथा नशा करने वाले व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिये |आजकल सर्वत्र उन्न्मुक्तता का दौर चल पड़ा है | पाश्चात्य जगत के अंधानुकरण में भारतीय समाज अपने भले बुरे का विवेक भी खोता चला जा रहा है | जो साधक है, संस्कृति का आदर करने वाले हैं, ईश्वर व गुरु में श्रद्धा रखते हैं ऐसे लोगो में शिष्टता व संयम विशेषरूप से होना चाहिये | पुरुष सिर्फ पुरुषों से तथा स्त्रियाँ सिर्फ स्त्रियों के संग ही होली मनायें | स्त्रियाँ यदि अपने घर में ही होली मनायें तो अच्छा है ताकि दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों कि कुदृष्टि से बच सकें |
होली मात्र लकड़ी के ढ़ेर जलाने का त्योहार नहीँ है |यह तो चित्त की दुर्बलताओं को दूर करनेका, मन की मलिन वासनाओं को जलाने का पवित्र दिन है | अपने दुर्गुणों, व्यसनों व बुराईओं को जलाने का पर्व है होली .......अच्छाईयाँ ग्रहण करने का पर्व है होली .........समाज में स्नेह का संदेश फैलाने का पर्व है होली..........
आज के दिन से विलासी वासनाओं का त्याग करके परमात्म प्रेम, सदभावना, सहानुभूति, इष्टनिष्ठा, जपनिष्ठा, स्मरणनिष्ठा, सत्संगनिष्ठा, स्वधर्म पालन , करुणा दया आदि दैवी गुणों का अपने जीवन में विकास करना चाहिये | भक्त प्रह्लाद जैसी दृढ़ ईश्वर निष्ठा, प्रभुप्रेम, सहनशीलता, व समता का आह्वान करना चाहिये | सत्य, शान्ति, प्रेम, दृढ़ता की विजय होती है इसका स्मरण दिलाता है आज का दिन | हिरण्यकश्यपु रूपी आसुरी वृत्ति तथा होलिका रूपी कपट की पराजय का दिन है होली, यह पवित्र पर्व परमात्मा में दृढ़ निष्ठावान के आगे प्रकृति द्वारा अपने नियमों को बदल देने की याद दिलाता है | मानव को भक्त प्रह्लाद की तरह विघ्न बाधाओं के बीच भी भगवदनिष्ठा टिकाए रखकर संसार सागर से पार होने का संदेश देने वाला पर्व 'होली' की हार्दिक शुभकामनाएं !
शनिवार, 6 जनवरी 2024
“ अस्वतंत्र मानसिकता वाला रट्टू तोता ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ अस्वतंत्र मानसिकता वाला रट्टू तोता ” कहानी ~ नमः वार्ता
एक बार एक संत ने एक बहेलिया को देखा जो तोतों को जाल में फंसाकर, पकड़कर बाजार में बेचने के लिए ले जा रहा था। उसे देखकर संत का मन बहुत व्याकुल हुआ। उस संत ने मन में संकल्प किया कि इन पक्षियों को मैं स्वतंत्र रहने के लिये शिक्षित करूंगा।
संत ने तोतों को शिक्षा देना प्रारंभ किया। तोतों ने संत द्वारा बताए हुए पाठ को शीघ्र ही कंठस्थ कर लिया।
पाठ था-
"बहेलिया आएगा"
"जाल बिछाएगा"
"दाना डालेगा"
"पर हम नहीं खाएंगे"
एक दिन बहेरिया पुनः जंगल में तोते पकड़ने के लिये आ गया और तोतों को ये गाते हुए देखकर उसका मन अति व्याकुल हुआ कि अब तो तोते मेरे जाल में नहीं फंसेंगे।
बहेलिये ने जाल बिछाया, दाने डाले और पक्षियों की प्रतीक्षा के लिए दुखी मन से एक ओर खड़ा हो गया।
कुछ क्षणों उपरांत ही वो हतप्रद हुआ जब देखा कि दाने डालते ही पक्षियों का झुण्ड ने तुरंत ही जाल की ओर आना प्रारंभ कर दिया और सभी जाल में फंस गए। जाल में फंसने के उपरांत भी पक्षी गाए जा रहे थे कि
बहेलिया आएगा
जाल बिछाएगा
दाना डालेगा
पर हम नहीं खाएंगे
बहेलिया ने जाल को उठाया और सभी पक्षियों को जाल में बांधकर चल पड़ा परंतु अब भी पक्षी फिर भी गाए जा रहे थे कि
बहेलिया आएगा,जाल बिछाएगा दाना डालेगा, हम नहीं खाएंगे
हम हिंदुओं का भी यही हाल है। पाश्चात्य सभ्यता से आज भी प्रभावित है, हिन्दू होने के नाते ग्लानि से मन भरा हुआ है क्योंकि अस्वतंत्रता की मानसिकता जा ही नही रही। एक ओर तो हम कह रहे हैं हिन्दू जागृत हो गया, गर्व से कहो हम हिन्दू है और दूसरी ओर अंग्रेजी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दे रहे हैं।
जिस प्रकार तोते ने बस पाठ रट लिया किंतु जैसे ही दाने का कच्चा लालच देखा तो अस्वतंत्र होने की मानसिकता प्रबल हो गयी। उसी प्रकार हम भी जानबूझकर सोच समझकर वही व्यवहार कर रहे हैं जबकि हैरानी है कि ये अंग्रेजों का नव वर्ष भी नही है।
सोचिए क्या आपके व्यापार में वर्ष बदला❓
क्या आपके विद्यालयों में वर्ष बदला❓❓
जब दिवाली होली जैसे त्योहार विकमी संवत के पंचांग के अनुसार मनाए तो अब अपनी संस्कृति और संस्कार को आपने क्यों बदला।
ध्यान दीजिए-
सप्त से-सेप्टेम्बर
अष्ट से-अक्टूबर
नवम से-नवम्बर
दशम से-दिसम्बर यानी (X मास रोमन में) ये उनके वर्ष का भी दसवां महीना है। अंग्रेजों के राजाओं ने अपने नाम पर जुलाई/अगस्त में 1-1 दिन बढ़वा कर ये महीने 31 दिन के कर दिये और वर्ष के अंत मे 12वे महीने फरवरी को 28 दिन का करना पड़ा।
प्रेषक-
#दिनेश बरेजा
शनिवार, 23 दिसंबर 2023
“महाबालिदान- शौर्य तथा शोक का सप्ताह” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“महाबालिदान- शौर्य तथा शोक का सप्ताह” कहानी ~ नमः वार्ता
पूस का 13वां दिन….
वजीर खां ने फिर पूछा- "बोलो इस्लाम स्वीकार करते हो"?
6 साल के छोटे साहिबजादे फ़तेह सिंह ने वजीर खां से पुछा-
"अगर मुसलमान हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न ?"
वजीर खां अवाक रह गया।
उसके मुँह से उत्तर न फूटा तो साहिबजादे ने उत्तर दिया कि "जब मुसलमान हो के भी मरना ही है , तो अपने धर्म में ही अपने धर्म की लिए क्यों न मरें ?"
दोनों साहिबजादों को जीवित दीवार में चुनवाने का आदेश हुआ। दीवार चिनी जाने लगी ।
जब दीवार 6 वर्षीय फ़तेह सिंह की गर्दन तक आ गयी तो 8 वर्षीय जोरावर सिंह रोने लगा।
फ़तेह ने पूछा, "जोरावर रोता क्यों है ?"
जोरावर बोला-"रो इसलिए रहा हूँ कि आया मैं पहले था पर धर्म के लिए बलिदान तू पहले हो रहा है"
.....सम्पूर्ण पढ़े>>शनिवार, 21 अक्टूबर 2023
रविवार, 11 जून 2023
“ स्वतंत्रता संग्राम के आधार-भारतीय मातृ शक्ति ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ स्वतंत्रता संग्राम के आधार-भारतीय मातृ शक्ति ” कहानी ~ नमः वार्ता
फाँसी से एक दिन पूर्व फाँसी पाने वाले व्यक्ति को उसके सगे सम्बन्धियों से भेंट का अवसर मिलता है। ठाकुर मुरलीधर ठकुराइन को साथ ना लाये थे कि माँ बहुत रोयेगी।
दल की ओर से शिव वर्मा भी सम्बन्धी बनकर राम प्रसाद बिस्मिल “ राम प्रसाद तोमर” से मिल लेना चाहते थे। उन्होंने मुरलीधर जी से बात की पर उन्होंने झिड़क दिया। इधर माँ अपने से ही गोरखपुर पहुँच गई और जेल के फाटक पर पहले से मौजूद थीं। शिव वर्मा ने माता से अनुनय की तो वे बोलीं, तुम राम प्रसाद बिस्मिल “ राम प्रसाद तोमर” के संगी हो और मेरे बेटे जैसे हो। मैं तुम्हें साथ ले चलूँगी कोई पूछे तो कह देना मेरे भतीजे हो, शेष मैं देख लूँगी।
नवम्बर १९२८ के चाँद पत्रिका के फाँसी अंक में राम प्रसाद बिस्मिल “ राम प्रसाद तोमर” व उनकी माताजी की अन्तिम भेंट का जो मार्मिक विवरण प्रकाशित
.....सम्पूर्ण पढ़े>>गुरुवार, 4 मई 2023
आय/जाति/निवास प्रमाण पत्र
बुधवार, 3 मई 2023
योजना और सुविधा~ नमः वार्ता
राशन कार्ड
उत्तर प्रदेश बोरिंग योजना लघु सिंचाई विभाग
निशुल्क बोरिंग योजना उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 31 मार्च 2023
मार्च समसामयिकी
सोमवार, 20 मार्च 2023
“ आस्था ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ आस्था ” कहानी ~ नमः वार्ता
पुरुषोत्तम जी घोर नास्तिक हैँ। ईश्वर मेँ उनका कतई विश्वास नहीँ है। एक दिन आवश्यक कार्य से उनके घर पहुंचा,तो देखा कि वहां सत्यनारायण जी की कथा हो रही है। पुरुषोत्तम जी अपनी पत्नी के साथ बैठे कथा श्रवण कर रहे हैँ। कथा के उपरांत हवन और आरती मेँ भी उनका समर्पण भाव देखते ही बनता था।
कथा पूरी होने के बाद मैँने उनसे पूछ लिया-'पुरुषोत्तम जी, आप तो अनीश्वरवादी हैँ?
हां।- उन्होँने उत्तर दिया।
मैँने पूछा-फिर अभी थोड़ी देर पहले जो मैँने देखा,वह क्या था?
पुरुषोत्तम जी ने समझाया-मेरी ईश्वर मेँ आस्था नहीँ है,तो क्या हुआ? अपनी पत्नी मेँ तो आस्था है। उससे प्रेम है। क्या हम अपनोँ की प्रसन्नता के लिए वह नहीँ कर सकते,जो उन्हेँ अच्छा लगे? -देवेन्द्र सुथार
शनिवार, 18 मार्च 2023
“ चार धाम की यात्रा ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ चार धाम की यात्रा ” कहानी ~ नमः वार्ता
रक्षाबंधन का त्यौहार पास आते ही मुझे सबसे ज्यादा जमशेदपुर वाली बुआ जी की राखी के आने की प्रतीक्षा रहती थी। कितना बड़ा पार्सल भेजती थी बुआ जी। भिन्न-भिन्न के मिठाई, खिलौने मां के लिए साड़ी, पापाजी के लिए कोई कपड़े।
इस बार भी बहुत सारा सामान भेजा था उन्होंने। पटना और रामगढ़ वाली दोनों बुआ जी ने भी रंग बिरंगी राखीयों के साथ बहुत सारे उपहार भेजे थे। बस रोहतास नगर वाली जया बुआ की राखी हर वर्ष की प्रकार एक साधारण से लिफाफे में आयी थी। पांच राखियाँ, कागज के टुकड़े में लपेटे हुए रोली चावल और पचास का एक नोट।
मां ने चारों बुआ जी के पैकेट डायनिंग टेबल पर रख दिए थे ताकि पापा कार्यालय से लौटकर एक दृष्टि अपनी बहनों की भेजी राखियां और उपहार देख ले। पापा प्रतिदिन की प्रकार आते ही टेबल पर भोजन का
.....सम्पूर्ण पढ़े>>शुक्रवार, 17 मार्च 2023
“ बनूंगी सासू माँ सी सासूमाँ ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ बनूंगी सासू माँ सी सासूमाँ ” कहानी ~ नमः वार्ता
सुबह 10 बार स्वर लगाने पर भी ना उठती हो जो कभी वो आज सुबह 6 बजे उठकर चाय बनाने लगी। समाचार पत्र ले आयी, पौधों को जल दे दिया, पापा को भी सुबह टहलने जाने के लिए जगाने आ गयी ! अंतता ये चक्कर क्या है। घर के सभी लोग रानी को बड़ी आश्चर्य मुद्रा में देखे जा रहे थे।
जब सब के सब्र का बांध टूट गया तो उसने बड़े ही सहज रूप में कहा, "वहाँ ससुराल में थोड़ी कोई होगा मेरे आगे पीछे घूमने के लिये"। विवाह पक्की हुए अभी 3 महीने ही हुए थे और अचानक से रानी की समझ में इतना परिवर्तन और बेटी को बड़ी होते देख सब प्रसन्न भी थे और दुखी भी।
विवाह हुई रानी अपने नए घर आयी। सुबह नींद नही खुलेगी यह सोचकर वह पूरी रात नहीं सोई। शीघ्र नहा धोकर, पूजा कर अपनी पहली रसोई की तैयारी की सोचने लगी। क्या बनाऊ जो सबको अच्छा लगे, बच्चो को भी पसंद आये ! इस सोच विचार में लगी थी कि एक सहज मीठी सी स्वर आयी, रानी तुम इतना शीघ्र क्यों उठ गई बेटा ?"
जैसे उन स्वरों में आनंद था! रानी ने जैसे ही पीछे मुड़ के देखा तो "सासु माँ" हाथ में विवाह के हिसाब के कुछ पन्ने लिए खड़ी थी। विवाह की दौड़ भाग में कितना परेशान हो गयी होगी, फिर घरवालो का स्मरण भी
.....सम्पूर्ण पढ़े>>गुरुवार, 16 मार्च 2023
“ बुजुर्गों का मन ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ बुजुर्गों का मन ” कहानी ~ नमः वार्ता
मां जी बहुत तेज वर्षा हो रही है आप खिड़की बंद कर दीजिए वर्षा की बूंदे आपको बीमार कर सकती हैं। प्रिशा अपनी सास मिथलेश जी से बोली।
नहीं बहू !! बूंदे यहां नहीं आ रही। तुम्हारे बाबूजी को बहुत पसंद थी वर्षा। घंटो बैठे रहते थे खिड़की पर हम दोनों। साथ में चलता था पकोड़े और चाय का दौर। सच क्या दिन थे वो भी अब तो ना उनका साथ रहा ना पकोड़े झेलने वाला शरीर! मिथलेश जी ठंडी आह भरकर बोली।
प्रिशा ने पकोडों की बात होने पर मिथलेश जी की आंखों में जो चमक देखी उससे प्रिशा की आंख भर आई। सच में बुढ़ापा ऐसा होता है जब जीभ तो बच्चों की तरह मचलती पर शरीर कुछ भी ऐसा वैसा खाने की अनुमति नहीं देता है। मां जी को शूगर और ब्लड प्रेशर की बीमारी के कारण चिकित्सक ने तला हुआ और मसालेदार खाना मना किया है।
मिथलेश जी अभी दो महीने पहले ही पति के मरने के बाद गांव का घर छोड़ बेटे बहु के पास आई है। यहां बहू प्रिशा बेटा तरुण पोता पोती सब हैं। बेटे बहू ने बाबूजी के ना रहने पर उन्हें अकेले नहीं रहने दिया तो मजबूरी में उन्हें शहर आना पड़ा था हालाकि उनके मन में शंका थी बहू कैसा व्यवहार करेगी पर बहू प्रिशा बहुत ध्यान रखती है सास का। पोते-पोती भी आगे पीछे घूमते रहते तो मिथलेश जी का मन लगा रहता है। पर इस उम्र में जीवनसाथी की कमी कोई पूरी नहीं कर
.....सम्पूर्ण पढ़े>>बुधवार, 15 मार्च 2023
“ अनदेखा आशीष - रिश्तों का महत्व ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ अनदेखा आशीष - रिश्तों का महत्व ” कहानी ~ नमः वार्ता
घर की नई नवेली इकलौती बहू एक स्ववित्त बैंक में बड़े पद पर थी । उसकी सास लगभग एक वर्ष पहले ही स्वर्गवासी हो चुकी थी । घर में बुज़ुर्ग ससुर औऱ उसके पति के अलावा कोई न था । पति का अपना कारोबार था ।
पिछले कुछ दिनों से बहू के साथ एक विचित्र बात होती ।बहू जब यथाशीघ्र घर का काम निपटा कर कार्यालय के लिए निकलती ठीक उसी समय ससुर उसे आवाज़ देते औऱ कहते बहू ,मेरा चश्मा साफ कर मुझें देती जा। लगातार कार्यालय के लिए निकलते समय बहू के साथ यही होता । काम के दबाव औऱ देर होने के कारण क़भी कभी बहू मन ही मन झल्ला जाती लेकिन फ़िरभी अपने ससुर को कुछ बोल नहीं पाती ।
जब बहू अपने ससुर के इस कार्य से पूर्ण रुपसे ऊब गई तो उसने पूरे प्रकरण को अपने पति के साथ साझा किया ।पति को भी अपने पिता के इस व्यवहार पर आश्चर्य हुआ लेकिन उसने अपने
.....सम्पूर्ण पढ़े>>मंगलवार, 14 मार्च 2023
“ गृहस्थी में त्याग ” कहानी ~ नमः वार्ता
🔆💥 जय श्री राम 🔆💥
“ गृहस्थी में त्याग ” कहानी ~ नमः वार्ता
विवाह की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर पति-पत्नी साथ में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे।
संसार की दृष्टि में वो एक आदर्श युगल था। प्रेम भी बहुत था दोनों में लेकिन कुछ समय से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संबंधों पर समय की धूल जम रही है। शिकायतें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं।
बातें करते-करते अचानक पत्नी ने एक सुझाव दिया कि मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना होता है लेकिन हमारे पास समय ही नहीं होता एक-दूसरे के लिए इसलिए मैं दो डायरियाँ ले आती हूँ और हमारी जो भी शिकायत हो हम पूरा वर्ष अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे।
अगले वर्ष इसी दिन हम एक-दूसरे की डायरी पढ़ेंगे ताकि हमें पता चल सके कि हममें कौन सी कमियां हैं जिससे कि उसका पुनरावर्तन ना हो सके।
पति भी सहमत हो गया कि विचार तो अच्छा है। डायरियाँ आ गईं और देखते ही देखते वर्ष बीत गया। अगले वर्ष फिर विवाह की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दोनों साथ बैठे।
एक-दूसरे की डायरियाँ लीं। पहले आप, पहले आप की मनुहार हुई। अंत में महिला प्रथम की परिपाटी के आधार पर पत्नी की लिखी डायरी पति ने पढ़नी शुरू की।
पहला पृष्ठ
दूसरा पृष्ठ
तीसरा पृष्ठ
"आज विवाह की वर्षगांठ पर मुझे ढंग का उपहार नहीं दिया"
"आज होटल में खाना खिलाने का कहकर करके भी नहीं ले गए"
"आज मेरे पसंदीदा हीरो की पिक्चर दि
.....सम्पूर्ण पढ़े>>